#40 ईश्वर
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एक ओर मेरा जितना ज्यादा रिक्त होते जाना; उतना ही अधिक प्रेम और करुणा का उफनता ज्वार। एक ओर संशयों के बीज लिए ये क्षणभंगुर काया; दूसरी ओर ये अनुभूति कि समूचे ब्रह्मांड की सहस्त्र भुजाएं मेरा अपना ही विस्तार। एक ओर तुम्हारे क्रूर षड्यंत्र, अनगिनत दृश्य प्रपंच; दूसरी ओर मेरी अविचल शाश्वत यात्रा। आश्चर्य!! विधाता तुझे भय है क्या? मेरे ईश्वर होने का।

