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Tushar Pandey
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#40 ईश्वर

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एक ओर मेरा 
जितना ज्यादा रिक्त होते जाना;
उतना ही अधिक प्रेम और करुणा 
का उफनता ज्वार।
 
एक ओर
संशयों के बीज लिए
ये क्षणभंगुर काया;
दूसरी ओर
ये अनुभूति कि
समूचे ब्रह्मांड की सहस्त्र
भुजाएं मेरा अपना ही विस्तार।

एक ओर 
तुम्हारे क्रूर षड्यंत्र, 
अनगिनत दृश्य प्रपंच;
दूसरी ओर
मेरी अविचल शाश्वत यात्रा।

आश्चर्य!!
विधाता तुझे भय है क्या?
मेरे ईश्वर होने का।
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