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Tushar Pandey
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#5 श्री रामदरबार दृश्यावलोकन

कविता

दृश्य बड़ा ही पावन है
ऋतुओं में जैसे सावन है
रामलला की झांकी ये
मनहर, सुरम्य, मनभावन है
अपने हिय को पल भर में चीर
श्री धाम दिखाते महावीर।

दरबार प्रकट, अद्भुत है धाम
आसन पर विराजें सियाराम
साकेतनगर सरयू के तीर
कर चंवर हिलाते महावीर।

प्रभु प्रेम सुधा सिरताज सजे
मद मान तजे औ' राम भजें,
प्रभु आप कहें जिनकी गाथा
धन्य धन्य वो महावीर।

सांसों में बहे पावक प्रचंड
मुख पर ओढ़ें मुस्कान मंद
भक्तों में श्रेष्ठ, वीरों में वीर
जय बजरंगी जय महावीर।
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