जब ऐसा कुछ लिखा जाता है जिसे वाकई महसूस किया गया हो तो पढ़ने वाले को समझने में ज़रा भी तकलीफ नही होती भले हर पहलू पाठक के अनुभव का भाग न भी रहा हो। सबसे ज़्यादा वो पंक्तियां जिनमें लिखा है कि समझदारी थक कर सो जाती है और एकाकीपन का भान लिए सिहरनें हिसाब लेने दौड़ती हैं और दीवार बस तमाशे को देखते रहता है, बहुत ज़्यादा अच्छे से लिखा हुआ है। पढ़कर अच्छा लगा।
जब ऐसा कुछ लिखा जाता है जिसे वाकई महसूस किया गया हो तो पढ़ने वाले को समझने में ज़रा भी तकलीफ नही होती भले हर पहलू पाठक के अनुभव का भाग न भी रहा हो। सबसे ज़्यादा वो पंक्तियां जिनमें लिखा है कि समझदारी थक कर सो जाती है और एकाकीपन का भान लिए सिहरनें हिसाब लेने दौड़ती हैं और दीवार बस तमाशे को देखते रहता है, बहुत ज़्यादा अच्छे से लिखा हुआ है। पढ़कर अच्छा लगा।
बहुत बहुत धन्यवाद, थोड़ा मुश्किल था पर इसे लिख डालना बेहद जरूरी था।
लेख की तारीफ़ की जाये या आपकी marketing strategy की 😀
Haha 🫢
आपकी लिखने की कला की दाद देना अनिवार्य है। बहुत सारे शब्दों को अपनी पिछली लिखी पोस्ट के साथ जोड़ना ताकि वाचक उन पोस्ट्स को भी पढ़ ले, वाह!
वैसे आपने इस कथा में “प्रेमिकाएं “ प्लूरल में संबोधित किया है, मसला क्या है, भाई?😉
जी हां, साहिर साहब के उस प्यारे गाने से जुड़ी हमारी एक लम्बी कहानी है दोस्त ।
दिल पागल था रोज़ नई नादानी करता था,
आग में आग मिलाता था फिर पानी करता था। (copied) 😄
बहुत शुक्रिया और आभार 🙏🏻