इश्क़ में होना, सैंकड़ों इंद्रधनुषों से, लबालब भर जाना होता है। और होता है, आंखों में, चांद लिए इतने हौले देखना, कि नजर ना चुभे कहीं। केवल पसरता रहे — ऊपर-ऊपर। इश्क़ में होना, पंछी बन जाना होता है। किसी छोटी गौरेया की पंखों की लय सुनते ही, हवाओं से हल्का हो, सुदूर क्षितिज तक, सैर करना होता है। इश्क़ में होना, मां हो जाना होता है। शिशु हो जाना होता है। खिलखिलाना होता है। आंसू बहाना होता है। मूरख हो जाना होता है। इश्क़ में होना, गुलाब की पंखुड़ी हो जाना होता है। गेहूं की झूमती हुई बाली हो जाना होता है। नदी हो जाना होता है। पहाड़ से सरकता, खनकता हुआ, छोटा पत्थर होना होता है। इश्क़ में होना, सूक्ष्म हो जाना होता है। सबमें शामिल होना होता है, ईश्वर बन जाना होना होता है, और घुप्प अंधेरी रातों में, सिर झुकाए, उनींदे, फ़रियादी होना होता है।
#50 इश्क़ में होना
कविता